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बादलों की धुन, बारिश की कविता

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निर्जल भूमि पर छाए हुए गहरे बादलों की धुन सुनकर, मानो हरिज में एक तरल ताजगी भर जाए। https://allenusyi026689.blogdigy.com/आक-श-क-ग-त-वर-ष-क-ल-खन-52328146

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